Saturday, March 13, 2010

कभी महफ़िल में रोये कभी मैखाने में रोये
आंसूं आँखों से टूटकर जाके पैमाने में रोये

देखे थे जो भी ख्वाब तेरे साथ जिन्दगी के
वो मुझसे लिपट कर के मेरे सिरहाने में रोये

मेरे आंसू बहे बहुत पर खरीददार मिला

रोने को तो हम जाके सरे ज़माने में रोये

मेरी जिंदगी की कमाई मेरे इश्क के जज्बात

जो तूने भुला दिया उस अफ़साने में रोये

तू रूबरू है मेरे पर मेरा हाल कुछ ऐसा है
बिन हाथ का भिखारी जैसे खजाने में रोये
तुझे मोहब्बत है बेहिसाब यही सोचता थे हम
तेरी हर झूटी आह पर हम अनजाने में रोये
किस मोड़ पर लाया ये मुस्कुराने का सफ़र

मेरी हंसी लब छोडके दिल के वीराने में रोये
मेरे रोने की सबब तू ये भी सोचले एक बार

कहीं मेरी मौत के बाद तू मुझे जलाने में रोये

देख ले बेवफा दिल से दी है तुझको दुआ

तेरा हर गम आकर के तेरे इस दीवाने में रोये