अगर हो सके तो बस इतनी इल्तिजा करना
फ़र्ज़ इस दोस्ती का कुछ अब तो अदा करना
जहाँ पर भी रहे बस खुश रहे वो जिंदगी मेरी
अब मेरी जगह तुम उसके वास्ते दुआ करना
छुड़ा करके मेरा अब हाथ तुम कैसे जाओगे
दो कदम भी बिन मोह्हबत चल न पाओगे
जब देखोगे जान जाते हुए अपने दीवाने
भरोसा है मुझे तुम भी तड़पकर लौट आओगे
छोड़ देने का तुझे कोई इरादा नहीं है
जबकि याद तुझे अपना कोई वादा नहीं है
निकाल भी देता तुझे दिल से मैं लेकिन
इस दिल में बस दरारे हैं दरवाजा नहीं है
मोहब्बत मर्द औरत की एक है जमाने के लिए
ये बात रहने दो अब यारो बस अफ़साने के लिए
परवाने जल के मर जाते हैं शमा की मोहब्बत में
कब जलती है शमा भला किसी परवाने के लिए