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तेरी याद ही नहीं सोने देती ,अब सुबह को जागें कैसे
हम तेज़ बहुत तुम कहते हो,फिर तू हमसे आगे किसे
जब तुम नहीं इस घर में,घर घर सा नहीं लगता है
अब तू ही बता कि दिल अपना इस घर में लगे कैसेतेरे बिना दिन ना निकले और बिन तेरे शाम ना हो
तुम बिन जाना मर जाएँ ऐसा अपना अंजाम ना हो
ये लो मेरे दिल कि किताब और अब इसको पढ़ डालो
इक भी पन्ना ढून्ढ के देदो जिसपे तुम्हारा नाम ना हो

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